ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Friday, January 29, 2010
शक
चाहने से पहले वफ़ा पे शक है जीने से पहले जिंदा होने पे शक है मुलाकात से पहले मिलन-ऐ-तारीख पे शक है इतना शक न कर ऐ ज़ालिम की तुझे हर सच पे शक है ॥
No comments:
Post a Comment