ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Wednesday, January 27, 2010
तलाश
में खुद ही अपनी तलाश में हूँ - मेरा कोई रहनुमा नहीं है वो क्या दिखायेंगे हमे रास्ता जिन्हें खुद अपना पता नहीं है बहुत दिनों से देख रहा हूँ मिल रही है सजा हर खता की पर पहेले कोई यह तो बता दे - कौन सी सजा कौन सी खता की है
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