ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Friday, January 22, 2010
दास्ताँ
मुझे भी अपनी दास्ताँ कहने दो आंसु कह रहे है दिल की बात कहेने दो बड़े बेवफा निकले तुम - ये बात सिर्फ आपने तक रहेने दो तुम हो गए किसी और के - कम से कम हमे तो अपनी खातिर जीने दो !!
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