ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Wednesday, January 20, 2010
रात
आज की रात बड़ी शोख और कातिल है आज तो फिर मुश्किल है नींद का आँखों में आना रोज़ सोचता हूँ में यही -- पर चलता तो रहता है ज़िन्दगी का आना जाना !!
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