
वफ़ा करके भी बेवफा का नाम पाया है
मोहबत करके हमने बस यही एक तोहफा एहसान पाया है
रहेने दे कुछ और न कह ऐ ज़ालिम
इल्म है सभी को -- कोई कहा अपनी फितरत छिपा पाया है
ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |