ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Wednesday, February 3, 2010
दीदार
आखिरी बार मिल लेना उस बद-नसीब से -- जो तड़प रहा है अरसे से तेरे दीदार को ज़ख्म गहरा जो दिया था तुने उसे -- पाक करता है उन्हें हर रात चीर के अंधकार को॥
No comments:
Post a Comment