ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Monday, February 15, 2010
तासीर
खवाबो कि तासीर बड़ी शक्थ होती है कभी ख़ुशी तो कभी गम देती है दोनों पहलु से रूबरू है नायाब आँखे सो कभी हँसती और कभी रोती है आँखे॥
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