
में वो नदी हूँ जिसका कोई किनारा नहीं है
पार तो जाना है पर पतवार का ठिकाना नहीं है
डूब जाऊंगा यह पार चला जाऊंगा -- इस जीवन के दिए में अब लौ का सहारा नहीं है!!
ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |