Friday, April 23, 2010

फ़न्हा



न समझ पाओगे यह सोचा न था -- यु बेखबर हो जाओगे यह सोचा न था |
होकर तेरे समा तुझमे जायेंगे यह सोचा न था -- मिटना तो था पर फ़न्हा तुझमे हो जायेंगे यह सोचा न था ||

Thursday, April 22, 2010

रिश्ते



हर रिश्ते कि उम्र होती है -- ज़िन्दगी कि डौर बांधे रखना भी एक जंग होती है |
जान जाती है दोनों के टूटने के बाद और ज़िन्दगी बेरंग होती है ||

रूह



मेरी रूह में तेरी सांसो की कमी बहुत है -- वह कह रहे है अब चले इतनी मुलाकात बहुत है |
मैने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है -- प्यार मेरा थम जाये जो कभी तो फिर शोक से चले जाना |
ऐसे में कहा जाओगे की आने वाली बरसात बहुत है -- साथ रहेना हमेशा कहेना की उम्र रिश्ते की हुई बहुत है ||