ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Friday, April 23, 2010
फ़न्हा
न समझ पाओगे यह सोचा न था -- यु बेखबर हो जाओगे यह सोचा न था | होकर तेरे समा तुझमे जायेंगे यह सोचा न था -- मिटना तो था पर फ़न्हा तुझमे हो जायेंगे यह सोचा न था ||
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