Thursday, August 18, 2011

देश

मेरी तरफ से इस नायाब देश के लिए एक छोटी सी पेशकश

आज़ादी की हवा चली लोग लड़ें, देश लड़ा भी और मरा भी, पर आज सामने है आज़ाद भारत जहाँ आज़ादी के मायने है लूटना, खसोटना, मारना, और अपनी आज़ादी से इन गुनाहो पर बड़ी असानी से परदा डालना | क्या इसी का देखा था सपना? एक खुद्दार भारतीय ने, आज हमसे ज़्यादा तो सरकार को आज़ादी चाहिए, अपने बैंक बैलेंस भरने की, भ्रष्टाचार को बड़ाने में, लोगो की आवाज़े बंद करने की | मज़ेदार बात तो यह है की हम हिन्दुस्तानी उन्हे यह आज़ादी देने मे कोई कोताही नही बरत रहे, हमने उन्हे दे दी है वो आज़ादी जिनकी उन्हे सख्त ज़रूरत है, तो अब जब पानी सर के उपर से बह निकला है, यह सोचना ज़रूरी हो गया है की ग़लती किसकी है, हमारी अपनी या उनकी जो हमारी दी हुई आज़ादी का नाजायस फ़ायदा उठाने मे इतना खो गये है की वो यह भी भूल गये है की जिनकी यह आज़ादी है वह उनसे पूछे बिना उसे सूली पर नही चड़ा सकते |

शायद वक़्त अभी भी है इसलिए उठ ए हिन्दुस्तान, थाम ले डोर फिर ओर बजा दे डंका जैसा फिर से निकला है वतन जलाने पापी की लंका बिना शंका - बिना शंका, ले तिरंगा कर दे फिर सब एक रंग का - एक रंग का, ताकि समझ ले यह जगत महान, फिर से उठ गया है हिन्दुस्तान - हिन्दुस्तान, मेरा भारत महान - मेरा भारत महान | वन्दे मातरम्

Tuesday, March 29, 2011

अमीर - ग़रीब


या खुदा इलतज़ा है तुझसे, बना बंदे को अमीर इतना की सपना हर पूरा कर सके |
या बना इतना ग़रीब की वो सपना ही नही देख सके |

गुज़ारिश


गुज़ारिश कर रहा हू उन तमाम रोशन दिलो के लिए, जलाए रखना यूही जसबा सभी नेक दिल बन्दो के लिए |
ज़िंदगी है ज़िंदगी रोशन करते चलो सब, एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे के हाथ को थामते चलो बस |

Monday, March 28, 2011

इलतज़ा


या खुदा से बस इतनी इलतज़ा है, की मेरा भी दिल ज़रा जावा है
दे दे मुझे भी हर वो खुशी, जिसमे सिर्फ़ तेरा ही दीदार गवाह है |

नज़राना



कबूल हुई इबादत सा हसीन तोहफा है तू, मेरी हर आछाई का खुदा की तरफ से एक नायाब नज़राना है तू, मेरी सास है तू मेरी धड़कन है तू, मेरे हर खवाब की तासीर है तू, इबादत है तू, जूसतजू है तू, रूह है तू, क्या क्या तुझे ओर नाम दू, मेरी परछाई है तू मेरी परछाई है तू...!