ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Monday, March 28, 2011
इलतज़ा
या खुदा से बस इतनी इलतज़ा है, की मेरा भी दिल ज़रा जावा है
दे दे मुझे भी हर वो खुशी, जिसमे सिर्फ़ तेरा ही दीदार गवाह है |
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