ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Thursday, April 22, 2010
रिश्ते
हर रिश्ते कि उम्र होती है -- ज़िन्दगी कि डौर बांधे रखना भी एक जंग होती है | जान जाती है दोनों के टूटने के बाद और ज़िन्दगी बेरंग होती है ||
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