ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Thursday, February 4, 2010
खुदा का दीदार
तुझमे खुदा का दीदार करता रहा -- तुझे पूजता और तेरे लिए ही दुआ करता रहा मालूम न था नाराज़ हो जायेगा वह एक दिन -- मैने तो सोचा था वह तुझमे ही बस्ता है॥
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