ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Wednesday, January 20, 2010
दामन
आंसुओ से भर गया दामन मेरा
फ़र्क नहीं आबाद हुआ रोशन तेरा
में तो हवा के मानिन्द था ठहेरा
आज कैद तो कल रिहा हो बेठा !!!
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