ज़िंदगी के तमाम पहलुओ से रूबरू कराते कई अनकहे सफर जिन्हे तय करने तो सभी निकेलते है पर कोई अपने नज़रिये ओर मनोबल से सुखद तो कोई यादगार बनाता है | ऐसे ही पलो मे जो विचारो का उतार चड़ाव हमारे ज़्हेन को छु जाता है उन्ही सब खलायातों से सरोबर है यह ब्लॉग |
Tuesday, October 19, 2010
डर
मंजिले उन्ही के कदम चूमती है जिनके होसलो में कभी डर का साया छिपा रहता है | डर ही तो होता है जो बेखाय्ली में होसले की बुनियाद देता है ||
Acha likhte ho
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