
हाथो की लकीरें हो जैसे - यह रास्ते क्यों होते है टेड़े मेड़े, कटते है काटते है,
मिलते है अपना रुख भी बदलते है - मिलाते भी है और दूर भी यही ले जाते है,
उलझनों में फसा तेरा कौन यह भी बतलाते है - पर सोचना यह है की रास्ते लकीरों से बनते है यह लकीरों से रास्ते |
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