(14 - जून - 2010) आज फिर बहुत अकेला हूँ, महसूस कर रहा हूँ यादो के उस बिछोने को जिसमे लपेट फिर एक बार मेरा खुदा लखनऊ के लिए रवाना हो गया, बात कर रहा हूँ जन्म देने वाले उस खुदा की जिसे दुनिया माँ - बाप के नाम से जानती है | ट्रेन चल पढ़ी है और लिए जा रही है उन्हें मुझसे दूर एक और बार, 3 साल का समय बड़ा अजीब साबित हो रहा है - मिलने बिछअड़ने की लुक्का छूपी में समय और जस्बात दोनों ही मेरे साथ खेलने में लगे हुए है, पर पता नहीं कब ठहराव के बादल आयेंगे और सब कुछ फिर स्थिर होगा |
25 दिनों का सफ़र उनके साथ मेरी ज़िन्दगी के सबसे हसीन पालो में से एक, जिन्हें में शायद कभी शब्दों में बयान नहीं कर सकता, बस कर रहा हूँ तो एक नाकाम कोशिश इस जस्बात को संजोने की या यह कहेना जय्दा सटीक रहेगा पिरोने की, जैसे मोती-मोती पिरोने से बनती है माला, में भी पिरोने चला हूँ अपने एह्सासो की गाथा |आँखे भरी और डबडबाई हुई लड़ रही दोनों एक दुसरे से, शायद धयान कही और करने की कोशिश में लगी हुई थी दोनों, जानती जो थी न करेंगी ऐसा तो छलक पड़ेंगी और दे जाएँगी इन यादो के पन्नो पे सिहाई का दाग, क्यों कि लिखा जाता है सफ़र ज़िन्दगी का जिस सिहाई से, कच्ची होती है बहुत पर यकीन जानिए इनका असर होता है बहुत गहरा जो बना जाता है रिश्तो को और पक्का |
खयालो से लड़ना काफी कठिन होता है और वापस अकेले होने का ख्याल काफी डरावना, वैसे वो उपरी तोर से तो कम पर अन्दर से पूरा खोखला कर जाता है और बदल जाता है एक इंसान को मुर्दा की शकल में, पर में अकेला नहीं हूँ वो हमेशा मेरे साथ है, उनका प्यार भरा हाथ हमेशा मेरे ऊपर है, बस कुछ ही दिन की तो बात है, में दिवाली पे घर जा रहा हूँ इसी खुशनुमा एहसास के साथ में आज फिर एक नयी सास ले के जी रहा हूँ |
bahut kamaal likha hai aashish tumne..ek ek shabd apne aap me tumhare dil ki tahe khol raha hai ..tum itna khoobsurat likh sakte ho...sach kahoo to maine kabhi nahi socha tha
ReplyDeletereally gr8 yaar... gr8 writing.. keep it.. Ab jyada tareef karoonga to tujhe mazak lagega..
ReplyDeleteKya likhte ho janab!!
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